देश के पूर्व चीफ जस्टिस जे. एस. वर्मा का 80 साल की उम्र में निधन हो गया है। जस्टिस वर्मा गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे, उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। 1933 में जन्मे जस्टिस वर्मा 1997 से 1998 तक में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे।जस्टिस वर्मा का नाम हाल ही में उस वक्त चर्चा में आया जब बीते साल 16 दिसंबर को दिल्ली गैंगरेप के बाद कानून की समीक्षा के लिए वर्मा की अध्यक्षता में कमिटी का गठन हुआ। अहम बात यह रही थी कि 1 महीने से भी कम वक्त में कमिटी ने अपनी 600 पन्नों की रिपोर्ट सौंप दी थी और सरकार ने ऐंटि रेप बिल में कमिटी के कई सुझाव को कानून का अमलीजामा भी पहनाया। उन्होंने तमाम दबावों को नकार दिया था जिनमे बलात्कार दोषियों को फांसी देने की मांग की गई थी।
जस्टिस वर्मा न्यूज चैनलों की संस्था एनबीएसए से भी जुड़े थे। जस्टिस वर्मा न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीएसए) के चेयरमैन पद पर थे। भारत में जिन जजों की सबसे ज्यादा चर्चा होती है उनमें जस्टिस वर्मा पहले नंबर पर हैं। इन्होंने रिटायर होने के बाद अपनी सक्रियता बनाई रखी। जब पूरा देश दिल्ली में हुए गैंग रेप के बाद आहत था तब जस्टिस वर्मा ने बड़ी मेहनत से ऐंटि रेप कानून में बदलाव के लिए अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट के बाद भारत सरकार ने भी अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए तत्काल संसद से बिल पास किया। जस्टिस वर्मा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके थे।






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